class 9th hindi varshik pariksha paper 2026 answer कक्षा 9वीं हिंदी वार्षिक परीक्षा पेपर 2026 उत्तर आपके प्रश्न पत्र से मिला लेना।
class 9th hindi varshik pariksha paper 2026 answer | paper – 1
Roll No……………………..
915
915-908114
कक्षा 9वीं वार्षिक परीक्षा, 2025-26
[401]
HINDI
हिन्दी
हिन्दी
निर्देश:
- (1) सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
- (2) प्रत्येक प्रश्न के लिए आवंटित अंक उसके सम्मुख अंकित हैं।
- (3) प्रश्न क्रमांक 1 से 5 तक 30 वस्तुनिष्ठ प्रश्न प्रत्येक उप प्रश्न पर 1 अंक निर्धारित हैं।
- (4) प्रश्न क्रमांक 6 से 17 तक कुल प्रश्न 12 हैं। प्रत्येक प्रश्न पर 2 अंक निर्धारित हैं। शब्द सीमा लगभग 30 शब्द है।
- (5) प्रश्न क्रमांक 18 से 20 तक कुल 4 प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न पर 3 अंक निर्धारित हैं। शब्द सीमा लगभग 75 शब्द हैं।
- (6) प्रश्न क्रमांक 21 से 23 तक कुल 4 प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न पर 4 अंक निर्धारित हैं। शब्द सीमा लगभग 120 शब्द हैं।
- (7) प्रश्न क्रमांक 6 से 23 तक सभी प्रश्नों के आंतरिक विकल्प दिए गए हैं।
प्र.1 सही विकल्प का चयन कर लिखिए —
(1×6=6)
(i) छायावाद के प्रमुख कवियों की संख्या कितनी है?
(ii) कबीरदास की एक रचना है —
(iii) काव्य के भेद हैं —
(iv) लेखक राहुल सांकृत्यायन के चारों तरफ क्या था?
(v) दो वर्णों के मेल से होने वाले परिवर्तन को कहते हैं —
(vi) फणीश्वरनाथ रेणु के प्रसिद्ध आंचलिक उपन्यास का नाम है —
उत्तर:
(i) (ख) चार
(ii) (क) बीजक
(iii) (ग) दृश्य और श्रव्य काव्य
(iv) (क) पुस्तकें
(v) (ख) संधि
(vi) (क) मैला आंचल
(i) (ख) चार
(ii) (क) बीजक
(iii) (ग) दृश्य और श्रव्य काव्य
(iv) (क) पुस्तकें
(v) (ख) संधि
(vi) (क) मैला आंचल
प्र.2 रिक्त स्थानों में सही विकल्प चुनकर लिखिए —
(1×6=6)
(i) एक भारतीय आत्मा ………………….. को कहा जाता है। (माखनलाल चतुर्वेदी / जयशंकर प्रसाद)
(ii) रस को काव्य की ………………….. बताया गया है। (मन / आत्मा)
(iii) महाकाव्य में जीवन का ………………….. चित्रण होता है। (संपूर्ण / अपूर्ण)
(iv) गधे का एक छोटा भाई भी है उसका नाम ………………….. है। (बैल / घोड़ा)
(v) सदाचार का विलोम ………………….. है। (विचार / दुराचार)
(vi) ‘रीढ़ की हड्डी’ ………………….. विधा में लिखी गई रचना है। (एकांकी / कहानी)
उत्तर:
(i) माखनलाल चतुर्वेदी
(ii) आत्मा
(iii) संपूर्ण
(iv) बैल
(v) दुराचार
(vi) एकांकी
(i) माखनलाल चतुर्वेदी
(ii) आत्मा
(iii) संपूर्ण
(iv) बैल
(v) दुराचार
(vi) एकांकी
प्र.3 निम्नलिखित कथनों के समक्ष सत्य या असत्य लिखिए —
(1×6=6)
(i) ललद्यद की रचनाएँ लोक जीवन से प्रेरित नहीं हैं। [ ……….. ]
(ii) ‘रसयुक्त वाक्य ही काव्य है।’ यह कथन आचार्य विश्वनाथ का है। [ ……….. ]
(iii) गाँधीजी के अनुसार, हमें अपनी बुनियाद पर कायम रहना चाहिए। [ ……….. ]
(iv) एकांकी में एक अंक होते हैं। [ ……….. ]
(v) विचार विनिमय के माध्यम को भाषा कहते हैं। [ ……….. ]
(vi) लेखिका मृदुला गर्ग ने अपनी नानी को देखा था। [ ……….. ]
उत्तर:
(i) असत्य
(ii) सत्य
(iii) सत्य
(iv) सत्य
(v) सत्य
(vi) असत्य
(i) असत्य
(ii) सत्य
(iii) सत्य
(iv) सत्य
(v) सत्य
(vi) असत्य
प्र.4 सही जोड़ी बनाकर लिखिए —
(1×6=6)
| स्तम्भ – (अ) | स्तम्भ – (ब) |
|---|---|
| (i) ग्राम श्री | (क) फणीश्वरनाथ रेणु |
| (ii) तीन वर्णों का समूह | (ख) निपात |
| (iii) लेखक की नजर अटक गई | (ग) जहर |
| (iv) ‘विष’ का पर्यायवाची | (घ) प्रेमचंद के फटे जूते पर |
| (v) भी, ही, भर | (ङ) गण |
| (vi) इस जल प्रलय में | (च) सुमित्रानंदन पंत |
सही जोड़ी:
(i) ग्राम श्री ➔ (च) सुमित्रानंदन पंत
(ii) तीन वर्णों का समूह ➔ (ङ) गण
(iii) लेखक की नजर अटक गई ➔ (घ) प्रेमचंद के फटे जूते पर
(iv) ‘विष’ का पर्यायवाची ➔ (ग) जहर
(v) भी, ही, भर ➔ (ख) निपात
(vi) इस जल प्रलय में ➔ (क) फणीश्वरनाथ रेणु
(i) ग्राम श्री ➔ (च) सुमित्रानंदन पंत
(ii) तीन वर्णों का समूह ➔ (ङ) गण
(iii) लेखक की नजर अटक गई ➔ (घ) प्रेमचंद के फटे जूते पर
(iv) ‘विष’ का पर्यायवाची ➔ (ग) जहर
(v) भी, ही, भर ➔ (ख) निपात
(vi) इस जल प्रलय में ➔ (क) फणीश्वरनाथ रेणु
प्र.5 निम्नलिखित प्रश्नों के एक-एक वाक्य में उत्तर लिखिए —
(1×6=6)
(i) रसखान किसके अनन्य भक्त हैं?
(ii) ‘मेघ आए बन-ठन के’ पंक्ति में कौनसा अलंकार है?
(iii) महादेवी वर्मा किस प्रदेश की विधान परिषद की सदस्या थीं?
(iv) समास के कितने प्रकार होते हैं?
(v) लेखिका मृदुला गर्ग के नाना पढ़ाई करने कहाँ गए थे?
(vi) ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी के रचनाकार का नाम लिखिए।
उत्तर:
(i) श्रीकृष्ण के
(ii) मानवीकरण अलंकार
(iii) उत्तर प्रदेश
(iv) छह (6)
(v) विलायत (इंग्लैंड)
(vi) जगदीश चंद्र माथुर
(i) श्रीकृष्ण के
(ii) मानवीकरण अलंकार
(iii) उत्तर प्रदेश
(iv) छह (6)
(v) विलायत (इंग्लैंड)
(vi) जगदीश चंद्र माथुर
(प्रश्नोत्तर खण्ड)
प्र.6 नई कविता की प्रमुख दो विशेषताएँ लिखिए।
(2)
अथवा
भक्तिकाल के प्रमुख दो कवियों के नाम एवं उनकी एक-एक रचनाओं को लिखिए।
नई कविता की विशेषताएँ: (1) नए प्रतीकों और बिंबों का प्रयोग। (2) यथार्थवाद और आधुनिक भावबोध की प्रधानता।
अथवा (भक्तिकाल): (1) तुलसीदास – रामचरितमानस। (2) कबीरदास – बीजक।
अथवा (भक्तिकाल): (1) तुलसीदास – रामचरितमानस। (2) कबीरदास – बीजक।
प्र.7 कवि रसखान के भाव सौन्दर्य की दो विशेषताएँ लिखिए।
(2)
अथवा
कवि माखनलाल चतुर्वेदी के भाव सौन्दर्य की दो विशेषताएँ लिखिए।
रसखान: (1) रसखान के काव्य में श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम और समर्पण की भावना है। (2) उनके पदों में ब्रज भूमि के प्राकृतिक सौंदर्य का मनमोहक वर्णन मिलता है।
अथवा (माखनलाल चतुर्वेदी): (1) उनके काव्य में देशभक्ति और राष्ट्रीयता की भावना कूट-कूट कर भरी है। (2) उनकी कविताओं में त्याग और बलिदान का स्वर प्रमुख है।
अथवा (माखनलाल चतुर्वेदी): (1) उनके काव्य में देशभक्ति और राष्ट्रीयता की भावना कूट-कूट कर भरी है। (2) उनकी कविताओं में त्याग और बलिदान का स्वर प्रमुख है।
प्र.8 कवयित्री ललद्यद का ‘घर जाने की चाह’ से क्या तात्पर्य है?
(2)
अथवा
मानसरोवर से कवि का क्या आशय है?
ललद्यद: घर जाने की चाह से कवयित्री का तात्पर्य संसार के जन्म-मरण के बंधन से मुक्त होकर अपने परमपिता परमात्मा (ईश्वर) के पास जाने से है।
अथवा (मानसरोवर): मानसरोवर से कवि कबीरदास का आशय मन रूपी उस पवित्र सरोवर से है, जिसमें ईश्वर के प्रति स्वच्छ और पवित्र विचार भरे हुए हैं।
अथवा (मानसरोवर): मानसरोवर से कवि कबीरदास का आशय मन रूपी उस पवित्र सरोवर से है, जिसमें ईश्वर के प्रति स्वच्छ और पवित्र विचार भरे हुए हैं।
प्र.9 कवि ‘पंत’ ने गाँव को ‘हरता जन मन’ क्यों कहा है?
(2)
अथवा
लता ने बादल रूपी मेहमान को किस तरह देखा और क्यों?
पंत जी: कवि ने गाँव को ‘हरता जन मन’ इसलिए कहा है क्योंकि गाँव का प्राकृतिक सौंदर्य अत्यंत मनमोहक है। खेतों में लहलहाती फसलें और हरियाली हर किसी का मन मोह लेती है।
अथवा (लता): लता ने बादल रूपी मेहमान को किवाड़ की ओट (दरवाजे के पीछे) से छिपकर देखा। क्योंकि बादल (मेहमान) पूरे एक साल बाद आए थे और नायिका (लता) उनसे मान-मनुहार (रूठना/शिकायत) कर रही थी।
अथवा (लता): लता ने बादल रूपी मेहमान को किवाड़ की ओट (दरवाजे के पीछे) से छिपकर देखा। क्योंकि बादल (मेहमान) पूरे एक साल बाद आए थे और नायिका (लता) उनसे मान-मनुहार (रूठना/शिकायत) कर रही थी।
प्र.10 पंडित जगन्नाथ के अनुसार काव्य की परिभाषा लिखिए।
(2)
अथवा
रस की परिभाषा एवं उसके अंगों के नाम लिखिए।
पंडित जगन्नाथ: “रमणीयार्थ प्रतिपादकः शब्दः काव्यम्” अर्थात् रमणीय (सुंदर) अर्थ का प्रतिपादन करने वाले शब्द ही काव्य कहलाते हैं।
अथवा (रस): काव्य को पढ़ने, सुनने या देखने से पाठक/दर्शक को जिस आनंद की अनुभूति होती है, उसे रस कहते हैं। इसके 4 अंग हैं: स्थायी भाव, विभाव, अनुभाव, संचारी भाव।
अथवा (रस): काव्य को पढ़ने, सुनने या देखने से पाठक/दर्शक को जिस आनंद की अनुभूति होती है, उसे रस कहते हैं। इसके 4 अंग हैं: स्थायी भाव, विभाव, अनुभाव, संचारी भाव।
प्र.11 दोहा छन्द की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।
(2)
अथवा
उपमा अलंकार की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।
दोहा छन्द: यह एक अर्धसममात्रिक छंद है। इसके पहले और तीसरे चरण में 13-13 तथा दूसरे और चौथे चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं। (उदाहरण: रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून…)
अथवा (उपमा अलंकार): जहाँ एक वस्तु या प्राणी की तुलना अत्यंत सादृश्य के कारण किसी अन्य प्रसिद्ध वस्तु या प्राणी से की जाती है। (उदाहरण: पीपर पात सरिस मन डोला।)
अथवा (उपमा अलंकार): जहाँ एक वस्तु या प्राणी की तुलना अत्यंत सादृश्य के कारण किसी अन्य प्रसिद्ध वस्तु या प्राणी से की जाती है। (उदाहरण: पीपर पात सरिस मन डोला।)
प्र.12 निबंध लेखन की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।
(2)
अथवा
एकांकी की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।
निबंध: (1) इसमें विचारों का तार्किक और क्रमबद्ध प्रस्तुतीकरण होता है। (2) इसमें लेखक का निजी दृष्टिकोण और भाषा शैली स्पष्ट होती है।
अथवा (एकांकी): (1) एकांकी में केवल एक ही अंक होता है। (2) यह जीवन की किसी एक प्रमुख घटना या समस्या पर आधारित होती है।
अथवा (एकांकी): (1) एकांकी में केवल एक ही अंक होता है। (2) यह जीवन की किसी एक प्रमुख घटना या समस्या पर आधारित होती है।
प्र.13 हरिशंकर परसाई अथवा महादेवी वर्मा की साहित्यिक विशेषताएँ निम्न बिन्दुओं के आधार पर लिखिए –
(i) दो रचनाएँ (ii) भाषा-शैली (2)
(i) दो रचनाएँ (ii) भाषा-शैली (2)
महादेवी वर्मा:
(i) रचनाएँ: यामा, नीहार, रश्मि, गिल्लू।
(ii) भाषा-शैली: महादेवी जी की भाषा अत्यंत उत्कृष्ट, संस्कृतनिष्ठ और परिमार्जित खड़ी बोली है। उनकी शैली में चित्रात्मकता, भावात्मकता और माधुर्य का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
(i) रचनाएँ: यामा, नीहार, रश्मि, गिल्लू।
(ii) भाषा-शैली: महादेवी जी की भाषा अत्यंत उत्कृष्ट, संस्कृतनिष्ठ और परिमार्जित खड़ी बोली है। उनकी शैली में चित्रात्मकता, भावात्मकता और माधुर्य का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
प्र.14 लेखक राहुल सांकृत्यायन ने तिब्बत की यात्रा किस वेश में की? लिखिए।
(2)
अथवा
सालिम अली पक्षी प्रेमी कैसे बने? लिखिए।
तिब्बत यात्रा: लेखक राहुल सांकृत्यायन ने तिब्बत की यात्रा एक भिखमंगे (भिखारी) के छद्म वेश में की थी, क्योंकि उस समय भारतीयों को तिब्बत यात्रा की अनुमति नहीं थी और डाकुओं का भी डर था।
अथवा (सालिम अली): बचपन में सालिम अली की एयरगन से एक नीले कंठ वाली गौरैया घायल होकर गिर पड़ी थी। उस पक्षी की दयनीय दशा को देखकर वे द्रवित हो गए और उसी घटना ने उन्हें पक्षी प्रेमी बना दिया।
अथवा (सालिम अली): बचपन में सालिम अली की एयरगन से एक नीले कंठ वाली गौरैया घायल होकर गिर पड़ी थी। उस पक्षी की दयनीय दशा को देखकर वे द्रवित हो गए और उसी घटना ने उन्हें पक्षी प्रेमी बना दिया।
प्र.15 छोटी बच्ची को बैलों के प्रति प्रेम क्यों उमड़ आया?
(2)
अथवा
आज की उपभोक्तावादी संस्कृति हमारे दैनिक जीवन को किस प्रकार प्रभावित कर रही है?
छोटी बच्ची: बच्ची की माँ मर चुकी थी और सौतेली माँ उसे मारती थी। बैलों (हीरा-मोती) को भी दिनभर जोता जाता और मारा जाता था। बच्ची ने उनके दुःख को अपने दुःख के समान समझा, इसलिए उसे उन पर प्रेम उमड़ आया।
अथवा (उपभोक्तावादी संस्कृति): यह संस्कृति दिखावे पर जोर देती है, जिससे समाज में असमानता और अशांति बढ़ रही है। मानवीय संबंध कमजोर हो रहे हैं और हम सुख-सुविधाओं के गुलाम होते जा रहे हैं।
अथवा (उपभोक्तावादी संस्कृति): यह संस्कृति दिखावे पर जोर देती है, जिससे समाज में असमानता और अशांति बढ़ रही है। मानवीय संबंध कमजोर हो रहे हैं और हम सुख-सुविधाओं के गुलाम होते जा रहे हैं।
प्र.16 वाक्य की परिभाषा एवं प्रकार लिखिए। (रचना के आधार पर)
(2)
अथवा
तत्सम शब्द क्या होते हैं? उदाहरण सहित लिखिए।
वाक्य: सार्थक शब्दों का ऐसा व्यवस्थित समूह जो पूरा आशय (अर्थ) प्रकट करे, वाक्य कहलाता है। रचना के आधार पर यह तीन प्रकार के होते हैं: 1. सरल वाक्य, 2. संयुक्त वाक्य, 3. मिश्र वाक्य।
अथवा (तत्सम): संस्कृत भाषा के वे शब्द जो हिंदी में बिना किसी बदलाव के ज्यों के त्यों प्रयोग किए जाते हैं, तत्सम शब्द कहलाते हैं। (उदाहरण: सूर्य, अग्नि, दुग्ध, रात्रि।)
अथवा (तत्सम): संस्कृत भाषा के वे शब्द जो हिंदी में बिना किसी बदलाव के ज्यों के त्यों प्रयोग किए जाते हैं, तत्सम शब्द कहलाते हैं। (उदाहरण: सूर्य, अग्नि, दुग्ध, रात्रि।)
प्र.17 गोलंबर के पास जनसंपर्क की गाड़ी क्या ऐलान कर रही थी?
(2)
अथवा
मृदुला गर्ग अपनी नानी से क्यों प्रभावित थीं?
गोलंबर: जनसंपर्क की गाड़ी लाउडस्पीकर से ऐलान कर रही थी कि बाढ़ का पानी शहर (राजेंद्र नगर आदि इलाकों) में घुसने की पूरी संभावना है, अतः सभी लोग सावधान हो जाएँ और सुरक्षित स्थानों पर चले जाएँ।
अथवा (मृदुला गर्ग): लेखिका अपनी नानी से इसलिए प्रभावित थीं क्योंकि उनकी नानी अनपढ़ और पर्दानशीं होते हुए भी स्वतंत्र विचारों वाली महिला थीं और उनके मन में देश की आज़ादी के लिए गहरा सम्मान और जुनून था।
अथवा (मृदुला गर्ग): लेखिका अपनी नानी से इसलिए प्रभावित थीं क्योंकि उनकी नानी अनपढ़ और पर्दानशीं होते हुए भी स्वतंत्र विचारों वाली महिला थीं और उनके मन में देश की आज़ादी के लिए गहरा सम्मान और जुनून था।
प्र.18 निम्नलिखित काव्यांश का संदर्भ-प्रसंग सहित भावार्थ लिखिए —
“ऊँचे कुल का जनमिया, जे करनी ऊँच न होई।
सुबरन कलस सुरा भरा, साधू निंदा सोई।।” (3)
“ऊँचे कुल का जनमिया, जे करनी ऊँच न होई।
सुबरन कलस सुरा भरा, साधू निंदा सोई।।” (3)
अथवा
“बालू के साँपों से अंकित,
गंगा की सतरंगी रेती।
सुन्दर लगती सरपत छाई,
तट पर तरबूजों की खेती।।”
गंगा की सतरंगी रेती।
सुन्दर लगती सरपत छाई,
तट पर तरबूजों की खेती।।”
पहला काव्यांश:
संदर्भ: यह साखी कबीरदास जी द्वारा रचित है।
प्रसंग: इसमें मनुष्य के कर्मों की महानता बताई गई है।
भावार्थ: कबीर कहते हैं कि केवल ऊँचे कुल में जन्म लेने से कोई बड़ा नहीं होता, यदि उसके कर्म अच्छे न हों। ठीक वैसे ही जैसे यदि सोने के घड़े में शराब (सुरा) भरी हो, तो भी सज्जन लोग उसकी निंदा ही करते हैं।
अथवा (दूसरा काव्यांश):
संदर्भ: सुमित्रानंदन पंत की कविता ‘ग्राम श्री’ से।
भावार्थ: गंगा तट की रेत पर हवा और पानी से बनी लहरिया साँपों की तरह दिखाई देती हैं जो धूप में सतरंगी चमकती हैं। किनारे पर उगी हुई सरपत घास और तरबूजों की खेती प्राकृतिक सौंदर्य को और बढ़ा रही है।
संदर्भ: यह साखी कबीरदास जी द्वारा रचित है।
प्रसंग: इसमें मनुष्य के कर्मों की महानता बताई गई है।
भावार्थ: कबीर कहते हैं कि केवल ऊँचे कुल में जन्म लेने से कोई बड़ा नहीं होता, यदि उसके कर्म अच्छे न हों। ठीक वैसे ही जैसे यदि सोने के घड़े में शराब (सुरा) भरी हो, तो भी सज्जन लोग उसकी निंदा ही करते हैं।
अथवा (दूसरा काव्यांश):
संदर्भ: सुमित्रानंदन पंत की कविता ‘ग्राम श्री’ से।
भावार्थ: गंगा तट की रेत पर हवा और पानी से बनी लहरिया साँपों की तरह दिखाई देती हैं जो धूप में सतरंगी चमकती हैं। किनारे पर उगी हुई सरपत घास और तरबूजों की खेती प्राकृतिक सौंदर्य को और बढ़ा रही है।
प्र.19 निम्नलिखित गद्यांश की संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या लिखिए —
“दोनों बैलों का ऐसा अपमान कभी न हुआ था। झूरी उन्हें फूल की छड़ी से भी न छूता था। उसकी टिटकार पर दोनों उड़ने लगते थे। यहाँ मार पड़ी। आहत-सम्मान की व्यथा तो थी ही, उस पर मिला सूखा भूसा! नाँद की तरफ आँख न उठाई।” (3)
“दोनों बैलों का ऐसा अपमान कभी न हुआ था। झूरी उन्हें फूल की छड़ी से भी न छूता था। उसकी टिटकार पर दोनों उड़ने लगते थे। यहाँ मार पड़ी। आहत-सम्मान की व्यथा तो थी ही, उस पर मिला सूखा भूसा! नाँद की तरफ आँख न उठाई।” (3)
अथवा
गाँधीजी ने कहा था कि हम स्वस्थ सांस्कृतिक प्रभावों के लिए अपने दरवाजे-खिड़की खुले रखें पर अपनी बुनियाद पर कायम रहें। उपभोक्ता संस्कृति हमारी सामाजिक नींव को ही हिला रही है। यह एक बड़ा खतरा है। भविष्य के लिए यह एक बड़ी चुनौती है।
पहला गद्यांश:
संदर्भ: मुंशी प्रेमचंद कृत ‘दो बैलों की कथा’ से।
व्याख्या: गया के घर हीरा-मोती का बहुत अपमान हुआ। उनका मालिक झूरी उन्हें बहुत प्यार करता था, लेकिन गया ने उन्हें पीटा और खाने को केवल सूखा भूसा दिया। इस अपमान और भूख से दुखी होकर बैलों ने चारे की ओर देखा तक नहीं।
अथवा (दूसरा गद्यांश):
संदर्भ: श्यामाचरण दुबे कृत ‘उपभोक्तावाद की संस्कृति’ से।
व्याख्या: गाँधीजी का मानना था कि हमें बाहरी दुनिया की अच्छी बातों को अपनाना चाहिए, लेकिन अपनी संस्कृति और जड़ों को नहीं छोड़ना चाहिए। आज की दिखावे वाली (उपभोक्तावादी) संस्कृति हमारी उसी सामाजिक नींव को खोखला कर रही है, जो हमारे भविष्य के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है।
संदर्भ: मुंशी प्रेमचंद कृत ‘दो बैलों की कथा’ से।
व्याख्या: गया के घर हीरा-मोती का बहुत अपमान हुआ। उनका मालिक झूरी उन्हें बहुत प्यार करता था, लेकिन गया ने उन्हें पीटा और खाने को केवल सूखा भूसा दिया। इस अपमान और भूख से दुखी होकर बैलों ने चारे की ओर देखा तक नहीं।
अथवा (दूसरा गद्यांश):
संदर्भ: श्यामाचरण दुबे कृत ‘उपभोक्तावाद की संस्कृति’ से।
व्याख्या: गाँधीजी का मानना था कि हमें बाहरी दुनिया की अच्छी बातों को अपनाना चाहिए, लेकिन अपनी संस्कृति और जड़ों को नहीं छोड़ना चाहिए। आज की दिखावे वाली (उपभोक्तावादी) संस्कृति हमारी उसी सामाजिक नींव को खोखला कर रही है, जो हमारे भविष्य के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है।
प्र.20 जल संरक्षण विषय पर विज्ञापन तैयार कीजिए।
(3)
अथवा
परीक्षा का समय निकट आने पर समय का सदुपयोग करने के लिए अपने मित्र से संवाद कीजिए।
विज्ञापन:
“जल है तो कल है!
पृथ्वी पर जीवन का आधार है जल। पानी की हर बूँद कीमती है, इसे व्यर्थ न बहाएँ। आज ही जल संरक्षण का संकल्प लें। भविष्य बचाएँ।
सौजन्य से: जनहित में जारी (जल बोर्ड)।”
अथवा (संवाद):
राम: श्याम, परीक्षा सिर पर है, तैयारी कैसी चल रही है?
श्याम: कुछ खास नहीं मित्र, समय ही नहीं मिलता।
राम: दोस्त, समय का सदुपयोग करो। एक टाइम-टेबल बनाओ। सोशल मीडिया और फोन में समय मत गँवाओ।
श्याम: तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो, आज से ही मैं पूरी लगन से पढ़ाई पर ध्यान दूँगा।
“जल है तो कल है!
पृथ्वी पर जीवन का आधार है जल। पानी की हर बूँद कीमती है, इसे व्यर्थ न बहाएँ। आज ही जल संरक्षण का संकल्प लें। भविष्य बचाएँ।
सौजन्य से: जनहित में जारी (जल बोर्ड)।”
अथवा (संवाद):
राम: श्याम, परीक्षा सिर पर है, तैयारी कैसी चल रही है?
श्याम: कुछ खास नहीं मित्र, समय ही नहीं मिलता।
राम: दोस्त, समय का सदुपयोग करो। एक टाइम-टेबल बनाओ। सोशल मीडिया और फोन में समय मत गँवाओ।
श्याम: तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो, आज से ही मैं पूरी लगन से पढ़ाई पर ध्यान दूँगा।
प्र.21 निम्नलिखित अपठित गद्यांश अथवा काव्यांश को पढ़कर नीचे दिये गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए —
(4)
निंदा का उद्गम हीनता और कमजोरी से होता है। निंदा करके उनके अहम को तुष्टि मिलती है। ज्यों कर्म क्षीण हो जाता है, त्यों निंदा की प्रवृत्ति में दिनों-दिन इजाफा होता चला जाता है। निंदा कुछ लोगों की पूँजी है, बड़ा लंबा-चौड़ा व्यापार फैलाते हैं वे इस पूँजी का। कई लोगों की प्रतिष्ठा ही दूसरों की कलंक, कथाओं के परायण पर आधारित होती है।
प्रश्न —
(i) उपर्युक्त अनुच्छेद का संभावित शीर्षक लिखिए। (1)
(ii) लोग दूसरों की निंदा क्यों करते हैं? (1)
(iii) उपर्युक्त गद्यांश का सारांश लिखिए। (2)
प्रश्न —
(i) उपर्युक्त अनुच्छेद का संभावित शीर्षक लिखिए। (1)
(ii) लोग दूसरों की निंदा क्यों करते हैं? (1)
(iii) उपर्युक्त गद्यांश का सारांश लिखिए। (2)
अथवा
“जी, पहले कुछ दिन शर्म लगी मुझको,
पर पीछे-पीछे अक्ल जगी मुझको,
जी, लोगों ने तो बेच दिये ईमान,
जी आप न हों सुनकर ज़्यादा हैरान,
मैं सोच समझकर आखिर,
अपने गीत बेचता हूँ,
जी हाँ हुजूर, मैं गीत बेचता हूँ।”
प्रश्न —
(i) उपर्युक्त काव्यांश का शीर्षक लिखिए।
(ii) कवि को गीत बेचने में शर्म क्यों नहीं आती?
(iii) उपर्युक्त काव्यांश का भावार्थ लिखिए।
पर पीछे-पीछे अक्ल जगी मुझको,
जी, लोगों ने तो बेच दिये ईमान,
जी आप न हों सुनकर ज़्यादा हैरान,
मैं सोच समझकर आखिर,
अपने गीत बेचता हूँ,
जी हाँ हुजूर, मैं गीत बेचता हूँ।”
प्रश्न —
(i) उपर्युक्त काव्यांश का शीर्षक लिखिए।
(ii) कवि को गीत बेचने में शर्म क्यों नहीं आती?
(iii) उपर्युक्त काव्यांश का भावार्थ लिखिए।
गद्यांश के उत्तर:
(i) शीर्षक: निंदा की प्रवृत्ति (या निंदा का उद्गम)।
(ii) लोग अपनी हीनता और कमजोरी छिपाने तथा अपने अहम् को संतुष्ट करने के लिए दूसरों की निंदा करते हैं।
(iii) सारांश: निंदा का जन्म व्यक्ति की हीनता और कर्महीनता से होता है। कमजोर व्यक्ति दूसरों की बुराई करके अपना अहंकार पुष्ट करता है और इसी बुराई को अपनी प्रतिष्ठा और व्यापार का साधन बना लेता है।
अथवा (काव्यांश के उत्तर):
(i) शीर्षक: गीत फरोश।
(ii) कवि को शर्म इसलिए नहीं आती क्योंकि उसने देखा कि समाज में लोग अपना ईमान तक बेच रहे हैं, ऐसे में अपनी कला (गीत) बेचना उसे गलत नहीं लगा।
(iii) भावार्थ: कवि कहता है कि शुरुआत में उसे अपने गीत बेचने में शर्म आती थी, लेकिन जब उसने दुनिया की वास्तविकता देखी कि लोग पैसों के लिए अपना ईमान बेच देते हैं, तो उसकी झिझक खत्म हो गई और वह भी अपनी जरूरत के लिए गीत बेचने लगा।
(i) शीर्षक: निंदा की प्रवृत्ति (या निंदा का उद्गम)।
(ii) लोग अपनी हीनता और कमजोरी छिपाने तथा अपने अहम् को संतुष्ट करने के लिए दूसरों की निंदा करते हैं।
(iii) सारांश: निंदा का जन्म व्यक्ति की हीनता और कर्महीनता से होता है। कमजोर व्यक्ति दूसरों की बुराई करके अपना अहंकार पुष्ट करता है और इसी बुराई को अपनी प्रतिष्ठा और व्यापार का साधन बना लेता है।
अथवा (काव्यांश के उत्तर):
(i) शीर्षक: गीत फरोश।
(ii) कवि को शर्म इसलिए नहीं आती क्योंकि उसने देखा कि समाज में लोग अपना ईमान तक बेच रहे हैं, ऐसे में अपनी कला (गीत) बेचना उसे गलत नहीं लगा।
(iii) भावार्थ: कवि कहता है कि शुरुआत में उसे अपने गीत बेचने में शर्म आती थी, लेकिन जब उसने दुनिया की वास्तविकता देखी कि लोग पैसों के लिए अपना ईमान बेच देते हैं, तो उसकी झिझक खत्म हो गई और वह भी अपनी जरूरत के लिए गीत बेचने लगा।
प्र.22 अपने प्राचार्य को स्थानान्तरण प्रमाण-पत्र प्राप्त करने हेतु आवेदन पत्र लिखिए।
(4)
अथवा
अपनी वार्षिक परीक्षा की तैयारी से अवगत कराते हुए अपने पिताजी को पत्र लिखिए।
आवेदन पत्र (प्रारूप):
सेवा में,
श्रीमान प्राचार्य महोदय,
शासकीय उ. मा. विद्यालय, (शहर का नाम)
विषय: स्थानांतरण प्रमाण पत्र (T.C.) हेतु आवेदन।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय की कक्षा 9वीं का छात्र हूँ। मेरे पिताजी का स्थानांतरण यहाँ से भोपाल हो गया है। इस कारण मैं यहाँ रहकर अपनी आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख सकता। अतः आपसे निवेदन है कि मुझे मेरा स्थानांतरण प्रमाण पत्र (T.C.) शीघ्र प्रदान करने की कृपा करें।
आपका आज्ञाकारी शिष्य,
(अपना नाम)
अथवा (पिताजी को पत्र प्रारूप):
पूज्य पिताजी,
सादर चरण स्पर्श। मैं यहाँ छात्रावास में कुशल-मंगल हूँ। मेरी वार्षिक परीक्षाएँ अगले महीने से शुरू होने वाली हैं। मैंने सभी विषयों का रिवीजन शुरू कर दिया है। विज्ञान और गणित की विशेष तैयारी कर रहा हूँ। आप चिंता न करें, मैं अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होऊँगा। माताजी को प्रणाम।
आपका प्रिय पुत्र,
(अपना नाम)
सेवा में,
श्रीमान प्राचार्य महोदय,
शासकीय उ. मा. विद्यालय, (शहर का नाम)
विषय: स्थानांतरण प्रमाण पत्र (T.C.) हेतु आवेदन।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय की कक्षा 9वीं का छात्र हूँ। मेरे पिताजी का स्थानांतरण यहाँ से भोपाल हो गया है। इस कारण मैं यहाँ रहकर अपनी आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख सकता। अतः आपसे निवेदन है कि मुझे मेरा स्थानांतरण प्रमाण पत्र (T.C.) शीघ्र प्रदान करने की कृपा करें।
आपका आज्ञाकारी शिष्य,
(अपना नाम)
अथवा (पिताजी को पत्र प्रारूप):
पूज्य पिताजी,
सादर चरण स्पर्श। मैं यहाँ छात्रावास में कुशल-मंगल हूँ। मेरी वार्षिक परीक्षाएँ अगले महीने से शुरू होने वाली हैं। मैंने सभी विषयों का रिवीजन शुरू कर दिया है। विज्ञान और गणित की विशेष तैयारी कर रहा हूँ। आप चिंता न करें, मैं अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होऊँगा। माताजी को प्रणाम।
आपका प्रिय पुत्र,
(अपना नाम)
प्र.23 निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर रूपरेखा सहित सारगर्भित निबंध लिखिए —
(4)
(i) जीवन में खेलों का महत्त्व
(ii) पर्यावरण प्रदूषण: कारण व निवारण
(iii) मेरी प्रिय पुस्तक
उत्तर (संकेत बिंदु – पर्यावरण प्रदूषण: कारण व निवारण):
रूपरेखा:
1. प्रस्तावना (प्रदूषण का अर्थ)
2. प्रदूषण के प्रकार (वायु, जल, ध्वनि, मृदा प्रदूषण)
3. प्रदूषण के मुख्य कारण (औद्योगीकरण, पेड़ों की कटाई, वाहनों का धुआँ)
4. प्रदूषण के दुष्प्रभाव (भयंकर बीमारियाँ, जलवायु परिवर्तन)
5. निवारण के उपाय (अधिक पेड़ लगाना, साफ-सफाई, जागरूकता)
6. उपसंहार (निष्कर्ष)
(छात्रों को परीक्षा में इन्ही बिंदुओं के आधार पर 100-120 शब्दों में निबंध का विस्तार करना होता है।)
रूपरेखा:
1. प्रस्तावना (प्रदूषण का अर्थ)
2. प्रदूषण के प्रकार (वायु, जल, ध्वनि, मृदा प्रदूषण)
3. प्रदूषण के मुख्य कारण (औद्योगीकरण, पेड़ों की कटाई, वाहनों का धुआँ)
4. प्रदूषण के दुष्प्रभाव (भयंकर बीमारियाँ, जलवायु परिवर्तन)
5. निवारण के उपाय (अधिक पेड़ लगाना, साफ-सफाई, जागरूकता)
6. उपसंहार (निष्कर्ष)
(छात्रों को परीक्षा में इन्ही बिंदुओं के आधार पर 100-120 शब्दों में निबंध का विस्तार करना होता है।)
class 9th hindi varshik pariksha paper 2026 answer | paper – 2
Roll No. ……………………..
901
901-H0901-A
कक्षा 9वीं वार्षिक परीक्षा, 2025-26
HINDI
हिन्दी
हिन्दी
(उत्तरकुंजिका सहित / With Answer Key)
निर्देश:
- (1) सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
- (2) प्रत्येक प्रश्न के लिए आवंटित अंक उसके सम्मुख अंकित हैं।
- (3) प्रश्न क्रमांक 1 से 5 तक 30 वस्तुनिष्ठ प्रश्न प्रत्येक उप प्रश्न पर 1 अंक निर्धारित हैं।
- (4) प्रश्न क्रमांक 6 से 17 तक कुल प्रश्न 12 हैं। प्रत्येक प्रश्न पर 2 अंक निर्धारित हैं। शब्द सीमा लगभग 30 शब्द है।
- (5) प्रश्न क्रमांक 18 से 20 तक कुल 3 प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न पर 3 अंक निर्धारित हैं। शब्द सीमा लगभग 75 शब्द हैं।
- (6) प्रश्न क्रमांक 21 से 23 तक कुल 3 प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न पर 4 अंक निर्धारित हैं। शब्द सीमा लगभग 120 शब्द हैं।
- (7) प्रश्न क्रमांक 6 से 23 तक सभी प्रश्नों के आंतरिक विकल्प दिए गए हैं।
प्र.1 सही विकल्प चयन करके लिखिए —
(1×6=6)
(i) कबीर दास जी की एक रचना है —
(ii) रसखान किस भक्ति शाखा के कवि हैं?
(iii) कामायनी है —
(iv) झूरी के साले का नाम था —
(v) दो वर्णों के मेल से होने वाले परिवर्तन को कहते हैं —
(vi) ‘इस जल प्रलय में’ पाठ की विधा है —
उत्तर:
(i) (ब) बीजक
(ii) (स) कृष्ण भक्ति शाखा
(iii) (स) महाकाव्य
(iv) (स) गया
(v) (अ) सन्धि
(vi) (ब) रिपोर्ताज
(i) (ब) बीजक
(ii) (स) कृष्ण भक्ति शाखा
(iii) (स) महाकाव्य
(iv) (स) गया
(v) (अ) सन्धि
(vi) (ब) रिपोर्ताज
प्र.2 उचित शब्दों का चयन कर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए —
(1×6=6)
(i) ललद्यद साँसों के कच्चे धागे से आत्मा रूपी ………………… खींच रही हैं। (नाव / जहाज)
(ii) दोहा ………………… छन्द है। (मात्रिक / वर्णिक)
(iii) खण्डकाव्य में जीवन की ………………… का चित्रण होता है। (संपूर्ण घटनाओं / किसी एक घटना)
(iv) ‘ल्हासा की ओर’ पाठ में मंदिर में हस्तलिखित ………………… पोथियाँ रखी थीं। (105 / 103)
(v) सामासिक शब्द या पद को अलग करना ………………… कहलाता है। (सन्धि विच्छेद / समास विग्रह)
(vi) मेरे नाना पक्के ………………… माने जाते हैं। (साहब / ठेकेदार)
उत्तर:
(i) नाव
(ii) मात्रिक
(iii) किसी एक घटना
(iv) 103
(v) समास विग्रह
(vi) साहब
(i) नाव
(ii) मात्रिक
(iii) किसी एक घटना
(iv) 103
(v) समास विग्रह
(vi) साहब
प्र.3 निम्नलिखित कथनों के समक्ष सत्य या असत्य लिखिए —
(1×6=6)
(i) रसखान के गुरु का नाम गो. विट्ठलनाथ था। [ ……….. ]
(ii) उपमा अलंकार में उप का अर्थ समीप है। [ ……….. ]
(iii) श्यामाचरण दुबे का जन्म उत्तर प्रदेश के बनारस में हुआ था। [ ……….. ]
(iv) सालिम अली की उम्र को शती तक पहुँचने में थोड़े ही दिन बचे थे। [ ……….. ]
(v) ‘उपहास’ शब्द में ‘उप’ शब्द उपसर्ग है। [ ……….. ]
(vi) परती का अर्थ वह जमीन है जो बोई-जोती नहीं जाती है। [ ……….. ]
उत्तर:
(i) सत्य
(ii) सत्य
(iii) असत्य (उनका जन्म मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में हुआ था)
(iv) सत्य
(v) सत्य
(vi) सत्य
(i) सत्य
(ii) सत्य
(iii) असत्य (उनका जन्म मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में हुआ था)
(iv) सत्य
(v) सत्य
(vi) सत्य
प्र.4 सही जोड़ी का मिलान कर लिखिए —
(1×6=6)
| स्तम्भ ‘अ’ | स्तम्भ ‘ब’ |
|---|---|
| (i) आधुनिक काल | (अ) मृदुला गर्ग |
| (ii) तीन वर्णों का समूह | (ब) रात्रि |
| (iii) बुद्धिहीन प्राणी | (स) धरा |
| (iv) रात का तत्सम | (द) गधा |
| (v) भूमि | (इ) गण |
| (vi) मेरे संग की औरतें | (फ) भारतेन्दु युग |
सही जोड़ी (उत्तर):
(i) आधुनिक काल ➔ (फ) भारतेन्दु युग
(ii) तीन वर्णों का समूह ➔ (इ) गण
(iii) बुद्धिहीन प्राणी ➔ (द) गधा
(iv) रात का तत्सम ➔ (ब) रात्रि
(v) भूमि ➔ (स) धरा
(vi) मेरे संग की औरतें ➔ (अ) मृदुला गर्ग
(i) आधुनिक काल ➔ (फ) भारतेन्दु युग
(ii) तीन वर्णों का समूह ➔ (इ) गण
(iii) बुद्धिहीन प्राणी ➔ (द) गधा
(iv) रात का तत्सम ➔ (ब) रात्रि
(v) भूमि ➔ (स) धरा
(vi) मेरे संग की औरतें ➔ (अ) मृदुला गर्ग
प्र.5 निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में लिखिए —
(1×6=6)
(i) छायावाद के चार प्रमुख स्तम्भ कवि कौन-कौन से हैं?
(ii) प्रबन्ध काव्य के भेदों के नाम लिखिए।
(iii) कहानी के कितने तत्व होते हैं?
(iv) ‘अंधकार’ शब्द का तद्भव रूप लिखिए।
(v) ‘साक्ष्य’ पत्रिका के विशेषांक का नाम लिखिए।
(vi) लेखिका मृदुला गर्ग की परदादी ने मंदिर में जाकर क्या मन्नत माँगी थी?
उत्तर:
(i) जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ और महादेवी वर्मा।
(ii) महाकाव्य और खण्डकाव्य (तथा आख्यानक गीतियाँ)।
(iii) कहानी के 6 तत्त्व होते हैं।
(iv) अँधेरा।
(v) नदियों की आग (बाढ़ विशेषांक)।
(vi) परदादी ने मंदिर में जाकर अपनी पतोहू (बहू) की पहली संतान लड़की (पुत्री) होने की मन्नत माँगी थी।
(i) जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ और महादेवी वर्मा।
(ii) महाकाव्य और खण्डकाव्य (तथा आख्यानक गीतियाँ)।
(iii) कहानी के 6 तत्त्व होते हैं।
(iv) अँधेरा।
(v) नदियों की आग (बाढ़ विशेषांक)।
(vi) परदादी ने मंदिर में जाकर अपनी पतोहू (बहू) की पहली संतान लड़की (पुत्री) होने की मन्नत माँगी थी।
प्र.6 प्रगतिवाद की प्रमुख दो विशेषताएँ लिखिए।
(2)
उत्तर: (1) शोषितों के प्रति सहानुभूति और शोषकों के प्रति विद्रोह की भावना। (2) यथार्थवादी और रूढ़िवाद का विरोध।
अथवा
नई कविता के दो कवियों के नाम एवं उनकी एक-एक रचना का नाम लिखिए।
उत्तर: (1) भवानी प्रसाद मिश्र – गीत फरोश। (2) दुष्यंत कुमार – साये में धूप।
प्र.7 कबीरदास अथवा कवयित्री ललद्यद के शिल्प सौन्दर्य की दो विशेषताएँ लिखिए।
(2)
उत्तर: कबीरदास का शिल्प सौन्दर्य: (1) कबीर की भाषा ‘सधुक्कड़ी’ या ‘पंचमेल खिचड़ी’ है। (2) इन्होने दोहा (साखी), चौपाई और पद (सबद) छंदों का सफलतापूर्वक प्रयोग किया है। अलंकार का स्वाभाविक प्रयोग है।
प्र.8 कवि ने सच्चे प्रेमी की क्या कसौटी बताई है?
(2)
उत्तर: कबीर के अनुसार सच्चे प्रेमी (भक्त) की कसौटी यह है कि उससे मिलने पर मन की सारी मलिनता और पाप नष्ट हो जाते हैं और मन में पवित्रता (अमृत) का संचार हो जाता है।
अथवा
ज्ञानी से कवयित्री ललद्यद का क्या अभिप्राय है?
उत्तर: ज्ञानी से कवयित्री का अभिप्राय उस व्यक्ति से है जिसने अपने अन्तःकरण (आत्मा) को पहचान लिया है और जिसे आत्मज्ञान प्राप्त हो गया है। ऐसा व्यक्ति ही ईश्वर को जान सकता है।
प्र.9 बंद द्वार की साँकल खोलने के लिये ललद्यद ने क्या उपाय सुझाया है?
(2)
उत्तर: कवयित्री ने उपाय सुझाया है कि मनुष्य को न तो पूरी तरह भोग-विलास में डूबना चाहिए और न ही पूर्ण सन्यासी बनना चाहिए। उसे इन्द्रियों पर नियंत्रण रखते हुए मध्यम मार्ग (समभाव) अपनाना चाहिए, तभी मुक्ति के द्वार की साँकल खुलेगी।
अथवा
कवि का ब्रज के वन, बाग और तालाब को निहारने के पीछे क्या कारण है?
उत्तर: कवि रसखान ब्रज भूमि से अत्यधिक प्रेम करते हैं क्योंकि वहाँ श्रीकृष्ण ने अनेक लीलाएँ की थीं। श्रीकृष्ण की यादों और उनके सामीप्य का अनुभव करने के लिए कवि ब्रज के वन, बाग और तालाब को निहारना चाहते हैं।
प्र.10 सवैया छन्द की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।
(2)
उत्तर: सवैया एक वाणिक छंद है। इसके प्रत्येक चरण में 22 से 26 वर्ण तक होते हैं।
उदाहरण: मानुष हौं तो वही रसखानि, बसौं ब्रज गोकुल गाँव के ग्वारन।
उदाहरण: मानुष हौं तो वही रसखानि, बसौं ब्रज गोकुल गाँव के ग्वारन।
अथवा
यमक अलंकार की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर: जहाँ किसी काव्य में एक शब्द का प्रयोग एक से अधिक बार हो, किन्तु हर बार उसका अर्थ अलग-अलग हो, वहाँ यमक अलंकार होता है।
उदाहरण: कनक कनक ते सौगुनी मादकता अधिकाय। (सोना और धतूरा)
उदाहरण: कनक कनक ते सौगुनी मादकता अधिकाय। (सोना और धतूरा)
प्र.11 महाकाव्य व खण्डकाव्य में दो अंतर लिखिए।
(2)
उत्तर: (1) महाकाव्य में नायक के सम्पूर्ण जीवन का चित्रण होता है, खण्डकाव्य में जीवन के किसी एक अंश का। (2) महाकाव्य में अनेक सर्ग और रस होते हैं, जबकि खण्डकाव्य का आकार छोटा और सर्ग कम होते हैं।
अथवा
पाठ्यमुक्तक व गेय मुक्तक में दो अंतर लिखिए।
उत्तर: (1) पाठ्य मुक्तक पढ़ने के लिए होते हैं (जैसे कबीर के दोहे), जबकि गेय मुक्तक गाये जाने के लिए होते हैं (जैसे मीरा के पद)। (2) पाठ्य मुक्तक में विचार प्रधान होते हैं, जबकि गेय मुक्तक में लय, ताल और संगीत की प्रधानता होती है।
प्र.12 कहानी व उपन्यास में कोई दो अंतर लिखिए।
(2)
उत्तर: 1. कहानी जीवन के किसी एक अंश या घटना पर आधारित होती है, जबकि उपन्यास में सम्पूर्ण जीवन का व्यापक चित्रण होता है। 2. कहानी में पात्रों की संख्या कम होती है और आकार छोटा होता है, जबकि उपन्यास विस्तृत होता है।
अथवा
यात्रा वृत्तान्त व संस्मरण में कोई दो अंतर लिखिए।
उत्तर: (1) यात्रा वृत्तांत में किसी स्थान विशेष की यात्रा का रोचक वर्णन होता है, जबकि संस्मरण किसी व्यक्ति या विशेष घटना की स्मृति (याद) पर आधारित होता है। (2) यात्रा वृत्तांत में स्थान और परिवेश प्रमुख होता है, संस्मरण में पात्र या घटना प्रमुख होती है।
प्र.13 प्रेमचन्द अथवा राहुल सांकृत्यायन की दो रचनायें लिखते हुए भाषा-शैली की विशेषताएँ लिखिए।
(2)
उत्तर: मुंशी प्रेमचंद: रचनाएँ – गोदान, गबन।
भाषा-शैली – प्रेमचंद जी की भाषा सहज, सरल और आम जनमानस (खड़ी बोली) की भाषा है। इन्होने उर्दू, फारसी के प्रचलित शब्दों और मुहावरों का सटीक प्रयोग किया है। इनकी शैली वर्णनात्मक एवं यथार्थवादी है।
भाषा-शैली – प्रेमचंद जी की भाषा सहज, सरल और आम जनमानस (खड़ी बोली) की भाषा है। इन्होने उर्दू, फारसी के प्रचलित शब्दों और मुहावरों का सटीक प्रयोग किया है। इनकी शैली वर्णनात्मक एवं यथार्थवादी है।
प्र.14 तिब्बत यात्रा के दौरान लेखक राहुल सांकृत्यायन को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा?
(2)
उत्तर: यात्रा के दौरान लेखक को भिखमंगे के वेश में यात्रा करनी पड़ी। उन्हें ऊँचे-निचे और खतरनाक डाँडे (पहाड़) पार करने पड़े जहाँ डाकुओं का डर था। कड़ी धूप और बर्फीली हवाओं का भी सामना करना पड़ा।
अथवा
लेखक श्यामाचरण दुबे ने उपभोक्तावादी संस्कृति को हमारे समाज के लिए चुनौती क्यों कहा है?
उत्तर: क्योंकि यह संस्कृति हमें केवल दिखावे और सुख-सुविधाओं का गुलाम बना रही है। इससे हमारी सामाजिक परम्पराएँ, मानवीय मूल्य और आपसी संबंध नष्ट हो रहे हैं तथा समाज में असमानता और अशांति बढ़ रही है।
प्र.15 लेखक के अनुसार जीवन में सुख से क्या अभिप्राय है?
(2)
उत्तर: ‘उपभोक्तावाद की संस्कृति’ पाठ के लेखक के अनुसार, आज के समाज में ‘सुख’ का अर्थ बदल गया है। आज लोग अधिक से अधिक उपभोक्ता वस्तुओं (चीज़ों) का उपयोग करने और दिखावा करने को ही सच्चा सुख मान बैठे हैं।
अथवा
किस घटना ने सालिम अली के जीवन की दिशा को बदल दिया और उन्हें पक्षी प्रेमी बना दिया?
उत्तर: बचपन में सालिम अली की एयरगन से एक नीले कंठ वाली गौरैया घायल होकर गिर पड़ी थी। उस नन्हीं गौरैया की पीड़ा देखकर उनका हृदय द्रवित हो गया, और इसी घटना ने उन्हें जीवन भर के लिए पक्षियों का प्रेमी और संरक्षक बना दिया।
प्र.16 मुहावरे एवं लोकोक्तियों में कोई दो अंतर लिखिए।
(2)
उत्तर: (1) मुहावरा एक वाक्यांश (वाक्य का अंश) होता है, जबकि लोकोक्ति अपने आप में पूर्ण वाक्य होती है। (2) मुहावरे का प्रयोग वाक्य के बीच में चमत्कार लाने के लिए होता है, जबकि लोकोक्ति का प्रयोग किसी कथन की पुष्टि या उदाहरण देने के लिए होता है।
अथवा
सन्धि और समास में कोई दो अंतर लिखिए।
उत्तर: (1) संधि दो वर्णों (अक्षरों) के मेल से होती है, जबकि समास दो शब्दों (पदों) का मेल है। (2) संधि को अलग करने को ‘संधि-विच्छेद’ कहते हैं, जबकि समास को अलग करने को ‘समास-विग्रह’ कहते हैं।
प्र.17 गोलंबर के पास जनसम्पर्क की गाड़ी क्या ऐलान कर रही थी?
(2)
उत्तर: जनसंपर्क की गाड़ी लाउडस्पीकर से ऐलान कर रही थी कि बाढ़ का पानी शहर में घुसने की पूरी संभावना है, इसलिए सभी लोग सतर्क हो जाएं और सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं।
अथवा
“शिक्षा बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार है”, इस दिशा में लेखिका (मृदुला गर्ग) के प्रयासों को लिखिए।
उत्तर: लेखिका ने कर्नाटक के डालमियानगर में बच्चों की शिक्षा के लिए अपने प्रयासों से एक प्राइमरी स्कूल खोला, जिसे बाद में सरकारी मान्यता भी दिलवाई, ताकि बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके।
प्र.18 निम्नलिखित पद्यांश का सप्रसंग भावार्थ लिखिए —
(3)
मानुष हौं तो वही रसखानि, बसौं ब्रज गोकुल गाँव के ग्वारन।
जौ पसु हौं तो कहा बस मेरो, चरौं नित नंद की धेनु मँझारन।।
जौ पसु हौं तो कहा बस मेरो, चरौं नित नंद की धेनु मँझारन।।
उत्तर:
प्रसंग: रसखान जी श्रीकृष्ण और उनकी ब्रजभूमि के प्रति अपना गहरा अनुराग प्रकट कर रहे हैं।
भावार्थ: कवि कहते हैं कि हे ईश्वर! यदि अगले जन्म में मुझे मनुष्य का शरीर मिले, तो मैं गोकुल गाँव के ग्वालों के बीच निवास करूँ। और यदि पशु योनि में जन्म मिले (जिस पर मेरा कोई वश नहीं), तो मैं चाहता हूँ कि मैं नन्द बाबा की गायों के बीच चरने वाला पशु बनूँ।
प्रसंग: रसखान जी श्रीकृष्ण और उनकी ब्रजभूमि के प्रति अपना गहरा अनुराग प्रकट कर रहे हैं।
भावार्थ: कवि कहते हैं कि हे ईश्वर! यदि अगले जन्म में मुझे मनुष्य का शरीर मिले, तो मैं गोकुल गाँव के ग्वालों के बीच निवास करूँ। और यदि पशु योनि में जन्म मिले (जिस पर मेरा कोई वश नहीं), तो मैं चाहता हूँ कि मैं नन्द बाबा की गायों के बीच चरने वाला पशु बनूँ।
अथवा
खा-खाकर कुछ पाएगा नहीं,
न खाकर बनेगा अहंकारी।
सम खा तभी होगा समभावी,
खुलेगी साँकल बंद द्वार की।
न खाकर बनेगा अहंकारी।
सम खा तभी होगा समभावी,
खुलेगी साँकल बंद द्वार की।
उत्तर:
प्रसंग: कवयित्री ललद्यद ने मनुष्य को भोग और त्याग के बीच का मध्यम मार्ग अपनाने की सीख दी है।
भावार्थ: कवयित्री कहती हैं कि हे मनुष्य! यदि तू सांसारिक भोग-विलास में डूबा रहेगा, तो तुझे कुछ नहीं मिलेगा। और यदि तू सब कुछ त्याग कर संन्यासी बन जाएगा, तो तेरे मन में अंहकार आ जाएगा। इसलिए तू अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण कर मध्यम मार्ग अपना। तभी तेरे मन के बंद द्वार खुलेंगे और प्रभु से मिलन होगा।
प्रसंग: कवयित्री ललद्यद ने मनुष्य को भोग और त्याग के बीच का मध्यम मार्ग अपनाने की सीख दी है।
भावार्थ: कवयित्री कहती हैं कि हे मनुष्य! यदि तू सांसारिक भोग-विलास में डूबा रहेगा, तो तुझे कुछ नहीं मिलेगा। और यदि तू सब कुछ त्याग कर संन्यासी बन जाएगा, तो तेरे मन में अंहकार आ जाएगा। इसलिए तू अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण कर मध्यम मार्ग अपना। तभी तेरे मन के बंद द्वार खुलेंगे और प्रभु से मिलन होगा।
प्र.19 निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या लिखिए —
(3)
विलासिता की सामग्रियों से बाजार भरा पड़ा है जो आपको लुभाने की जी तोड़ कोशिश में निरंतर लगी रहती हैं। दैनिक जीवन में काम आनेवाली वस्तुओं को ही लीजिए। टूथ-पेस्ट चाहिए? यह दाँतों को मोती जैसा चमकीला बनाता है, यह मुँह की दुर्गंध हटाता है। यह मसूड़ों को मजबूत करता है और यह पूर्ण सुरक्षा देता है।
उत्तर:
प्रसंग: यह गद्यांश श्यामाचरण दुबे के ‘उपभोक्तावाद की संस्कृति’ पाठ से लिया गया है। इसमें बाज़ार के आकर्षण का वर्णन है।
व्याख्या: लेखक कहते हैं कि आज बाजार विलासिता (सुख-सुविधा) की चीजों से भरा है। विज्ञापन हमें इन चीजों को खरीदने के लिए ललचाते हैं। जैसे- एक सामान्य ‘टूथपेस्ट’ के विज्ञापन हमें बताते हैं कि यह दाँतों को मोती सा चमकाएगा और सुरक्षा देगा। ये लुभावने दावे उपभोक्ता को फंसाने के लिए किए जाते हैं।
प्रसंग: यह गद्यांश श्यामाचरण दुबे के ‘उपभोक्तावाद की संस्कृति’ पाठ से लिया गया है। इसमें बाज़ार के आकर्षण का वर्णन है।
व्याख्या: लेखक कहते हैं कि आज बाजार विलासिता (सुख-सुविधा) की चीजों से भरा है। विज्ञापन हमें इन चीजों को खरीदने के लिए ललचाते हैं। जैसे- एक सामान्य ‘टूथपेस्ट’ के विज्ञापन हमें बताते हैं कि यह दाँतों को मोती सा चमकाएगा और सुरक्षा देगा। ये लुभावने दावे उपभोक्ता को फंसाने के लिए किए जाते हैं।
अथवा
जटिल प्राणियों के लिए सालिम अली हमेशा एक पहेली बने रहेंगे। बचपन के दिनों में उनकी एयरगन से घायल होकर गिरने वाली, नीले कंठ की वह गौरैया सारी जिंदगी उन्हें खोज के नए-नए रास्तों की तरफ ले जाती रही। जिंदगी की ऊँचाइयों में उनका विश्वास एक क्षण के लिए भी डिगा नहीं।
उत्तर:
प्रसंग: यह गद्यांश जाबिर हुसैन रचित ‘साँवले सपनों की याद’ से लिया गया है। इसमें सालिम अली के पक्षी प्रेमी बनने की घटना का वर्णन है।
व्याख्या: लेखक कहते हैं कि सामान्य लोगों के लिए सालिम अली का पक्षियों के प्रति इतना गहरा प्रेम समझना मुश्किल है। बचपन में उनकी बन्दूक से घायल हुई एक गौरैया ने उनके जीवन को बदल दिया और उन्हें पक्षियों की खोज के मार्ग पर लगा दिया। उनका आत्मविश्वास और प्रकृति के प्रति समर्पण कभी कम नहीं हुआ।
प्रसंग: यह गद्यांश जाबिर हुसैन रचित ‘साँवले सपनों की याद’ से लिया गया है। इसमें सालिम अली के पक्षी प्रेमी बनने की घटना का वर्णन है।
व्याख्या: लेखक कहते हैं कि सामान्य लोगों के लिए सालिम अली का पक्षियों के प्रति इतना गहरा प्रेम समझना मुश्किल है। बचपन में उनकी बन्दूक से घायल हुई एक गौरैया ने उनके जीवन को बदल दिया और उन्हें पक्षियों की खोज के मार्ग पर लगा दिया। उनका आत्मविश्वास और प्रकृति के प्रति समर्पण कभी कम नहीं हुआ।
प्र.20 शिक्षक एवं शिष्य के बीच ‘स्वच्छ भारत अभियान’ को लेकर हुई वार्तालाप को संवाद के रूप में लिखिए।
(3)
उत्तर:
शिक्षक: रमेश, क्या तुम्हें पता है कि हमारे स्कूल में स्वच्छ भारत अभियान चलाया जा रहा है?
शिष्य: जी गुरुजी, मैंने इसके बारे में सुना है। इसका क्या उद्देश्य है?
शिक्षक: इसका उद्देश्य हमारे आस-पास के वातावरण को साफ और स्वच्छ रखना है। गन्दगी से बीमारियां फैलती हैं।
शिष्य: हाँ गुरुजी, अब से मैं भी कूड़ा हमेशा कूड़ेदान में ही डालूँगा और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करूँगा।
शिक्षक: बहुत अच्छे रमेश! यही एक सच्चे नागरिक का कर्त्तव्य है।
शिक्षक: रमेश, क्या तुम्हें पता है कि हमारे स्कूल में स्वच्छ भारत अभियान चलाया जा रहा है?
शिष्य: जी गुरुजी, मैंने इसके बारे में सुना है। इसका क्या उद्देश्य है?
शिक्षक: इसका उद्देश्य हमारे आस-पास के वातावरण को साफ और स्वच्छ रखना है। गन्दगी से बीमारियां फैलती हैं।
शिष्य: हाँ गुरुजी, अब से मैं भी कूड़ा हमेशा कूड़ेदान में ही डालूँगा और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करूँगा।
शिक्षक: बहुत अच्छे रमेश! यही एक सच्चे नागरिक का कर्त्तव्य है।
अथवा
‘योग का महत्त्व’ विषय पर अनुच्छेद लिखिए।
उत्तर: योग का महत्त्व: योग भारत की एक प्राचीन विद्या है जो शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखने में मदद करती है। नियमित योग करने से शारीरिक बीमारियां दूर होती हैं, मांसपेशियां मजबूत होती हैं और मानसिक शांति मिलती है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव से बचने के लिए योग एक रामबाण उपाय है। योग हमें अनुशासन सिखाता है और हमारी कार्यक्षमता को बढ़ाता है। इसलिए, स्वस्थ जीवन के लिए योग को दिनचर्या का हिस्सा बनाना आवश्यक है।
प्र.21 निम्नलिखित अपठित काव्यांश अथवा गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए —
(4)
वैदिक युग भारत का प्रायः सबसे स्वाभाविक काल था। यही कारण है कि आज तक भारत का मन उस काल की ओर बार-बार लोभ से देखता है। वैदिक आर्य अपने युग को स्वर्णकाल कहते थे या नहीं, हम यह नहीं जानते किन्तु उनका समय हमें स्वर्ण-काल के समान अवश्य दिखाई देता है।
प्रश्न —
(i) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
(ii) वैदिक युग स्वर्ण-काल के समान क्यों प्रतीत होता है?
(iii) उपर्युक्त गद्यांश का सारांश लिखिए।
उत्तर:
(i) शीर्षक: भारत का वैदिक युग (या वैदिक युग: भारत का स्वर्ण-काल)
(ii) वैदिक युग भारत का सबसे स्वाभाविक और उन्नत काल था, इसीलिए यह आज हमें स्वर्ण-काल के समान प्रतीत होता है।
(iii) सारांश: भारत का वैदिक युग अत्यधिक स्वाभाविक और श्रेष्ठ था। आज भी भारतीय जनमानस उस काल को ललचाई नजरों से देखता है और उसे एक स्वर्ण-काल के रूप में स्वीकार करता है।
(i) शीर्षक: भारत का वैदिक युग (या वैदिक युग: भारत का स्वर्ण-काल)
(ii) वैदिक युग भारत का सबसे स्वाभाविक और उन्नत काल था, इसीलिए यह आज हमें स्वर्ण-काल के समान प्रतीत होता है।
(iii) सारांश: भारत का वैदिक युग अत्यधिक स्वाभाविक और श्रेष्ठ था। आज भी भारतीय जनमानस उस काल को ललचाई नजरों से देखता है और उसे एक स्वर्ण-काल के रूप में स्वीकार करता है।
अथवा
नारी! तुझे ही अपनी शक्ति को पहचानना होगा, पर्दे से बाहर आना होगा, मर्दों को सबक सिखाना होगा। अबला बनकर जीना अब छोड़ दे, अन्याय की बेड़ियों को तोड़ दे। कल्याण होगा तभी नारी जाति का।
प्रश्न —
(i) उपर्युक्त काव्यांश का उपयुक्त शीर्षक लिखिए।
(ii) कविता में किसे व क्यों जागरूक किया जा रहा है?
(iii) उपर्युक्त काव्यांश का भावार्थ लिखिए।
उत्तर:
(i) शीर्षक: नारी सशक्तीकरण (या जागो नारी)
(ii) कविता में ‘नारी’ को जागरूक किया जा रहा है, ताकि वह अपनी शक्ति पहचाने और अन्याय के खिलाफ लड़कर अपना कल्याण कर सके।
(iii) भावार्थ: कवि नारी से आह्वान करता है कि वह अबला और कमजोर बनकर रहना छोड़ दे। उसे घर की चारदीवारी से बाहर आकर अपनी ताकत पहचाननी होगी और अन्याय का डटकर सामना करना होगा, तभी नारी जाति की भलाई संभव है।
(i) शीर्षक: नारी सशक्तीकरण (या जागो नारी)
(ii) कविता में ‘नारी’ को जागरूक किया जा रहा है, ताकि वह अपनी शक्ति पहचाने और अन्याय के खिलाफ लड़कर अपना कल्याण कर सके।
(iii) भावार्थ: कवि नारी से आह्वान करता है कि वह अबला और कमजोर बनकर रहना छोड़ दे। उसे घर की चारदीवारी से बाहर आकर अपनी ताकत पहचाननी होगी और अन्याय का डटकर सामना करना होगा, तभी नारी जाति की भलाई संभव है।
प्र.22 अपने प्राचार्य को स्थानान्तरण प्रमाण पत्र प्राप्त करने हेतु आवेदन पत्र लिखिए।
(4)
उत्तर: (प्रारूप)
सेवा में,
श्रीमान प्राचार्य महोदय,
शासकीय उ. मा. विद्यालय, (शहर का नाम)
विषय: स्थानांतरण प्रमाण पत्र (T.C.) प्राप्त करने हेतु आवेदन।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय की कक्षा 9वीं का छात्र हूँ। मेरे पिताजी का स्थानांतरण यहाँ से भोपाल हो गया है और मेरा पूरा परिवार वहीं जा रहा है। इस कारण मैं यहाँ अपनी आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख सकता।
अतः आपसे निवेदन है कि मुझे मेरा स्थानांतरण प्रमाण पत्र (T.C.) शीघ्र प्रदान करने की कृपा करें।
धन्यवाद!
आपका आज्ञाकारी शिष्य,
नाम: (अ. ब. स.)
सेवा में,
श्रीमान प्राचार्य महोदय,
शासकीय उ. मा. विद्यालय, (शहर का नाम)
विषय: स्थानांतरण प्रमाण पत्र (T.C.) प्राप्त करने हेतु आवेदन।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय की कक्षा 9वीं का छात्र हूँ। मेरे पिताजी का स्थानांतरण यहाँ से भोपाल हो गया है और मेरा पूरा परिवार वहीं जा रहा है। इस कारण मैं यहाँ अपनी आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख सकता।
अतः आपसे निवेदन है कि मुझे मेरा स्थानांतरण प्रमाण पत्र (T.C.) शीघ्र प्रदान करने की कृपा करें।
धन्यवाद!
आपका आज्ञाकारी शिष्य,
नाम: (अ. ब. स.)
अथवा
प्रातः कालीन सैर के लाभ बताते हुए अपने छोटे भाई को पत्र लिखिए।
उत्तर: (प्रारूप)
स्थान: (परीक्षा भवन/शहर)
दिनांक: __/__/2026
प्रिय अनुज रमेश,
सदा खुश रहो।
मैं यहाँ कुशल-मंगल हूँ और आशा करता हूँ तुम भी ठीक होगे। मुझे पिताजी के पत्र से पता चला कि आजकल तुम्हारा स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता। मैं तुम्हें सलाह दूँगा कि तुम सुबह जल्दी उठकर प्रातः कालीन सैर (Morning Walk) पर जाया करो। सुबह की ताजी हवा फेफड़ों को ताकत देती है, दिनभर ताजगी रहती है और शरीर बीमारियों से दूर रहता है। आशा है तुम मेरी इस सलाह को मानोगे।
तुम्हारा बड़ा भाई,
(अपना नाम)
स्थान: (परीक्षा भवन/शहर)
दिनांक: __/__/2026
प्रिय अनुज रमेश,
सदा खुश रहो।
मैं यहाँ कुशल-मंगल हूँ और आशा करता हूँ तुम भी ठीक होगे। मुझे पिताजी के पत्र से पता चला कि आजकल तुम्हारा स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता। मैं तुम्हें सलाह दूँगा कि तुम सुबह जल्दी उठकर प्रातः कालीन सैर (Morning Walk) पर जाया करो। सुबह की ताजी हवा फेफड़ों को ताकत देती है, दिनभर ताजगी रहती है और शरीर बीमारियों से दूर रहता है। आशा है तुम मेरी इस सलाह को मानोगे।
तुम्हारा बड़ा भाई,
(अपना नाम)
प्र.23 निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर रूपरेखा सहित सारगर्भित निबंध लिखिए —
(4)
(i) जल संरक्षण
(ii) मेरी प्रिय पुस्तक
(iii) पर्यावरण प्रदूषण-कारण एवं निदान
(iv) आदर्श विद्यार्थी के गुण
(v) जीवन में खेलों का महत्त्व
उत्तर (संकेत बिंदु – पर्यावरण प्रदूषण: कारण एवं निदान):
रूपरेखा:
1. प्रस्तावना (प्रदूषण का अर्थ)
2. प्रदूषण के प्रकार (वायु, जल, ध्वनि, मृदा)
3. प्रदूषण के कारण (औद्योगीकरण, वनों की कटाई, वाहनों का धुआँ)
4. प्रदूषण के दुष्प्रभाव (भयंकर बीमारियाँ, ओजोन परत का नुकसान)
5. प्रदूषण रोकने के उपाय (अधिक पेड़ लगाना, फैक्ट्रियों को शहर से दूर करना)
6. उपसंहार
(छात्र इन्ही बिंदुओं के आधार पर 100-120 शब्दों में निबंध का विस्तार करें।)
रूपरेखा:
1. प्रस्तावना (प्रदूषण का अर्थ)
2. प्रदूषण के प्रकार (वायु, जल, ध्वनि, मृदा)
3. प्रदूषण के कारण (औद्योगीकरण, वनों की कटाई, वाहनों का धुआँ)
4. प्रदूषण के दुष्प्रभाव (भयंकर बीमारियाँ, ओजोन परत का नुकसान)
5. प्रदूषण रोकने के उपाय (अधिक पेड़ लगाना, फैक्ट्रियों को शहर से दूर करना)
6. उपसंहार
(छात्र इन्ही बिंदुओं के आधार पर 100-120 शब्दों में निबंध का विस्तार करें।)
class 9th hindi varshik pariksha paper 2026 answer ऊपर 2 school का दिया है और अलग आया आपका पेपर तो नीचे पेपर को भेज कर तुरंत answer जान सकते है। बाकी हमारे व्हाट्सएप और टेलीग्राम चैनल पर सॉल्यूशन भेज दिया गया है।
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