Kaksha 8 hindi varshik pariksha paper 2026 – कक्षा 8 हिंदी वार्षिक परीक्षा पेपर 2026 imp प्रश्न पत्र answer
राज्य शिक्षा केन्द्र म. प्र. भोपाल
वार्षिक परीक्षा सत्र – 2025-26
विषय – हिंदी (प्रथम भाषा)
समय- 2 ½ घण्टेकक्षा – 8पूर्णांक-60
बहुविकल्पीय प्रश्न (प्रश्न क्र. 1-5)
निर्देश – सही विकल्प चुनकर उत्तर लिखिए। प्रत्येक प्रश्न के लिए 1 अंक निर्धारित है।
प्र-1 ‘धुआँधार’ किसका नाम है? (1)
(A) जल प्रपात (B) नौकायन का (C) संगम का (D) डेल्टा का
उत्तर: (A) जल प्रपात
प्र-2 मोहन के सत्याग्रह में उसका साथ किसने दिया? (1)
(A) माँ ने (B) पुलिस चाचा ने (C) मित्रों ने (D) दूधवाले ने
उत्तर: (C) मित्रों ने
प्र-3 “श्री मुफ्तानंद जी से मिलिए” पाठ किस विधा का है? (1)
(A) संस्मरण (B) कहानी (C) व्यंग्य (D) रिपोर्ताज
उत्तर: (C) व्यंग्य
प्र-4 कवि किसे ‘जगमग’ करने को कह रहा है? (1)
(A) स्वयं को (B) संसार को (C) घर को (D) विद्यालय को
उत्तर: (B) संसार को
प्र-5 ‘प्रतिदिन’ शब्द में कौन-सा समास है? (1)
(A) तत्पुरुष समास (B) अव्ययीभाव समास (C) द्वंद्व समास (D) कर्मधारय समास
उत्तर: (B) अव्ययीभाव समास
रिक्त स्थान (प्रश्न 6-10)
निर्देश – नीचे दिए गए रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए। प्रत्येक प्रश्न के लिए 1 अंक निर्धारित है।
प्र-6 गांधी जी का ………………….. चिकित्सा पद्धति पर विश्वास था। (1)
उत्तर: प्राकृतिक
प्र-7 तानसेन ने तन्मय होकर ………………….. की साधना की। (1)
उत्तर: संगीत
प्र-8 ‘भेड़ाघाट’ में ………………….. नदी बहती है। (1)
उत्तर: नर्मदा
प्र-9 भारत ने विश्व को ………………….. का संदेश दिया है। (1)
उत्तर: शांति
प्र-10 ‘नीति’ में ‘इक’ प्रत्यय जुड़ने पर ………………….. शब्द बनेगा। (1)
उत्तर: नैतिक
अति लघु उत्तरीय प्रश्न (प्रश्न 11-16)
निर्देश – नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर एक शब्द/वाक्य में लिखिए। प्रत्येक प्रश्न के लिए 2 अंक निर्धारित हैं।
प्र-11 महाराजा छत्रसाल क्यों अविस्मरणीय हैं? (2)
उत्तर: महाराजा छत्रसाल अपने शौर्य, पराक्रम और मुगलों से कड़ा संघर्ष कर बुंदेलखंड को स्वतंत्र कराने के लिए अविस्मरणीय हैं।
प्र-12 शिवाजी ने किसके विरुद्ध तलवार उठाई थी? (2)
उत्तर: शिवाजी ने मुगल सम्राट औरंगजेब के अत्याचारों के विरुद्ध तलवार उठाई थी।
प्र-13 कवि भारत में कौन-सा मन्त्र भरने की बात कह रहा है? (2)
उत्तर: कवि भारत में ‘नव अमृत मन्त्र’ (स्वतंत्रता और नव-जागरण का मंत्र) भरने की बात कह रहा है।
प्र-14 वसीयतनामे में जायदाद कितने पुत्रों को बाँटने का संकेत था? (2)
उत्तर: वसीयतनामे में जायदाद तीन पुत्रों को बाँटने का संकेत था।
प्र-15 कुमार गन्धर्व का वास्तविक नाम क्या था? (2)
उत्तर: कुमार गन्धर्व का वास्तविक नाम ‘शिवपुत्र सिद्धरामैया कोमकली’ था।
प्र-16 छंद किसे कहते हैं? (2)
उत्तर: जिस काव्य रचना में वर्णों या मात्राओं की संख्या, यति, गति और तुक आदि के नियमों का पालन किया जाता है, उसे छंद कहते हैं।
लघु उत्तरीय प्रश्न (प्रश्न 17-22)
निर्देश – नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर 30-40 शब्दों में लिखिए। प्रत्येक प्रश्न के लिए 3 अंक निर्धारित हैं।
प्र-17 गोरे व्यापारियों को भारतीयों से ईर्ष्या क्यों होने लगी? (3)
उत्तर: गोरे व्यापारियों को भारतीयों से ईर्ष्या इसलिए होने लगी क्योंकि भारतीय व्यापारी अत्यंत परिश्रमी थे, उनका व्यापार तेजी से बढ़ रहा था और वे कम मुनाफे पर अच्छी चीजें बेचते थे, जिससे गोरे व्यापारियों के व्यापार को भारी नुकसान हो रहा था।
प्र-18 कुमार गन्धर्व ने कौन-कौन से रागों की रचना की? (3)
उत्तर: कुमार गन्धर्व ने ‘मालवती’, ‘लग्न गंधार’, ‘सहेली तोड़ी’ और ‘गांधी मल्हार’ जैसे कई नवीन और मधुर रागों की रचना की।
प्र-19 रैदास ने भगवान से अपना सम्बन्ध स्थापित करते हुए किस-किससे अपने को जोड़ा है? (3)
उत्तर: रैदास ने भगवान से अपना सम्बन्ध स्थापित करते हुए स्वयं को पानी, मोर, बाती, धागा और दास बताया है, जबकि भगवान को क्रमशः चन्दन, घन (बादल), दीपक, मोती और स्वामी कहकर पुकारा है।
प्र-20 अंग्रेजों ने बिरसा का दाह-संस्कार सार्वजनिक रूप से क्यों नहीं किया? (3)
उत्तर: अंग्रेजों ने बिरसा मुंडा का दाह-संस्कार सार्वजनिक रूप से इसलिए नहीं किया क्योंकि उन्हें डर था कि बिरसा के शव को देखकर उनके अनुयायी और आम जनता भड़क सकती है और अंग्रेजों के खिलाफ फिर से कोई बड़ा विद्रोह खड़ा हो सकता है।
प्र-21 वार्षिक परीक्षा की तैयारी की जानकारी देते हुए पिताजी को पत्र लिखिए? (3)
उत्तर:
पूज्य पिताजी,
सादर चरण स्पर्श।
मैं यहाँ छात्रावास में कुशलपूर्वक हूँ और आशा करता हूँ कि आप सभी भी वहाँ सानंद होंगे। मेरी वार्षिक परीक्षाएँ निकट आ गई हैं और मेरी तैयारी बहुत अच्छी चल रही है। मैंने सभी विषयों का पाठ्यक्रम पूरा कर लिया है और अब केवल दोहराने (रिवीजन) का कार्य चल रहा है। गणित और विज्ञान पर मैं विशेष ध्यान दे रहा हूँ। मुझे पूरा विश्वास है कि मैं इस बार भी अच्छे अंक प्राप्त करूँगा। माताजी को मेरा प्रणाम कहिएगा।
आपका आज्ञाकारी पुत्र,
(अपना नाम)
प्र-22 निम्नलिखित रसों के स्थायी भाव लिखिए – (3)
1. करुण 2. भयानक 3. शान्त
उत्तर:
1. करुण रस – शोक
2. भयानक रस – भय
3. शान्त रस – निर्वेद (या वैराग्य)
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (प्रश्न 23 – 26)
निर्देश – नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर 70-80 शब्दों में लिखिए। प्रत्येक प्रश्न के लिए 5 अंक निर्धारित हैं।
प्र-23 निम्नलिखित पंक्तियों का सन्दर्भ सहित भाव स्पष्ट कीजिए – (5)
प्रभु जी तुम चन्दन हम पानी, जाकी अंग-अंग बास समानी॥
प्रभु जी तुम घन बन हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा॥
प्रभु जी तुम दीपक हम बाती, जाकी जोति बरै दिन राती॥
प्रभु जी तुम मोती हम धागा, जैसे सोनहिं मिलत सुहागा॥
प्रभु जी तुम स्वामी हम दासा, ऐसी भक्ति करै रैदासा॥
उत्तर:
सन्दर्भ: ये पंक्तियाँ संत रैदास जी के पदों से ली गई हैं। इनमें कवि ने ईश्वर के प्रति अपनी अनन्य और दास्य भक्ति को प्रकट किया है。
भावार्थ: रैदास जी कहते हैं कि हे प्रभु! आप चंदन हैं और मैं पानी हूँ। जिस प्रकार चंदन पानी में मिलकर अपनी सुगंध पानी के कण-कण में बिखेर देता है, उसी प्रकार आपकी भक्ति मेरी रग-रग में बस गई है। हे प्रभु, आप बादल हैं और मैं जंगल का मोर हूँ जो बादलों को देखकर प्रसन्न होता है। आप चंद्रमा हैं और मैं चकोर पक्षी हूँ। हे प्रभु, आप दीपक हैं और मैं उसकी बाती हूँ जो दिन-रात आपके प्रेम में जलती है। आप मोती हैं और मैं वह धागा हूँ जिसमें मोती पिरोया जाता है। आप मेरे स्वामी हैं और मैं आपका दास हूँ। रैदास जी इसी दास्य भाव से ईश्वर की भक्ति करते हैं।
अथवा
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।
वस्तु अमोलक दी मेरे सतगुरु, किरपा कर अपनायो।।
जनम-जनम की पूँजी पाई, जग में सभी खोवायो।
खरचै नहिकोई चोर नलेवे, दिन-दिन बढ़त सवायो।।
उत्तर:
सन्दर्भ: ये पंक्तियाँ कृष्ण-भक्त कवयित्री मीराबाई के पदों से ली गई हैं।
भावार्थ: मीराबाई कहती हैं कि मैंने ईश्वर (राम-नाम) रूपी अनमोल रत्न प्राप्त कर लिया है। मेरे सद्गुरु ने मुझ पर कृपा करके मुझे यह अमूल्य वस्तु दी है और मैंने इसे अपना लिया है। ऐसा लगता है जैसे मैंने जन्म-जन्मांतरों की खोई हुई सच्ची पूँजी प्राप्त कर ली है और इस संसार की मोह-माया को छोड़ दिया है। यह राम-नाम रूपी धन ऐसा है जिसे न तो खर्च किया जा सकता है और न ही कोई चोर इसे चुरा सकता है। बल्कि यह तो दिन-प्रतिदिन सवाया (बढ़ता ही) होता जाता है।
प्र-24 निम्नलिखित गद्यांश का सन्दर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या कीजिए- (5)
आराधना साधना और प्रार्थना ने संगीत को संजीवनी बनाया। अतीत से वर्तमान तक मध्य प्रदेश अपने इतिहास में संगीत के कीर्तिमान स्थापित करता चला आ रहा है। संगीत की शक्ति ‘से दीप जलाना और वर्षा कराना संगीत की साधना की विजय है।
उत्तर:
सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘भाषा भारती’ के पाठ ‘मध्य प्रदेश की संगीत विरासत’ से लिया गया है।
प्रसंग: इसमें मध्य प्रदेश में संगीत की महान परंपरा और संगीत की अद्भुत शक्ति का वर्णन किया गया है।
व्याख्या: लेखक कहते हैं कि मध्य प्रदेश में संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं रहा, बल्कि इसे ईश्वर की आराधना, कठोर साधना और सच्ची प्रार्थना का रूप माना गया है। इसी कारण संगीत में जीवनदायिनी शक्ति (संजीवनी) आ गई है। प्राचीन काल से लेकर आज तक मध्य प्रदेश ने संगीत के क्षेत्र में ऐसे-ऐसे कीर्तिमान स्थापित किए हैं जिन पर गर्व किया जा सकता है। तानसेन जैसे महान साधकों ने अपने गायन से बुझे हुए दीपक जला दिए और बिना बादल के वर्षा करा दी। यह कोई जादू नहीं, बल्कि उनकी संगीत साधना की महान विजय थी।
प्र-25 निम्नलिखित अपठित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए – (5)
इस संसार में सबसे अमूल्य वस्तु है ‘समय’। इस संसार में सभी वस्तुओं को घटाया-बढ़ाया जा सकता है। पर समय नहीं। समय किसी के अधीन नहीं रहता। न रुक सकता है और न किसी की प्रतीक्षा करता है। विद्यार्थी जीवन में समय का अपना महत्व है। समय का सदुपयोग करने वाला व्यक्ति सदैव सफल होकर एक श्रेष्ठ नागरिक बनता है। समय का सदुपयोग तो केवल उद्यमी और कर्मठ व्यक्ति कर सकता है। आलस्य समय का सबसे बड़ा शत्रु है। विद्यार्थियों को इस शत्रु से सावधान रहना चाहिए।
- (क) उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक लिखिए।
उत्तर: समय का महत्त्व (या ‘समय का सदुपयोग’) - (ख) समय का सबसे बड़ा शत्रु कौन है?
उत्तर: समय का सबसे बड़ा शत्रु ‘आलस्य’ है। - (ग) कौन-सा व्यक्ति श्रेष्ठ नागरिक बन सकता है?
उत्तर: समय का सदुपयोग करने वाला व्यक्ति सदैव सफल होकर श्रेष्ठ नागरिक बन सकता है। - (घ) समय का सदुपयोग कौन-सा व्यक्ति कर सकता है?
उत्तर: समय का सदुपयोग केवल उद्यमी और कर्मठ व्यक्ति ही कर सकता है।
प्र-26 निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबंध लिखिए – (5)
- (i) पर्यावरण प्रदूषण
- (ii) मेरा प्रिय खेल
- (iii) कंप्यूटर का महत्व
उत्तर: (संकेत बिंदु – कंप्यूटर का महत्व)
1. प्रस्तावना: आज का युग विज्ञान और तकनीक का युग है। कंप्यूटर आज मानव जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है।
2. कंप्यूटर के विविध उपयोग: शिक्षा, चिकित्सा, मनोरंजन, बैंकिंग और व्यापार जैसे हर क्षेत्र में कंप्यूटर का उपयोग हो रहा है। इंटरनेट के माध्यम से यह पूरी दुनिया को एक गांव में बदल चुका है।
3. विद्यार्थियों के लिए महत्व: ऑनलाइन पढ़ाई, प्रोजेक्ट बनाना और नई जानकारी खोजने में कंप्यूटर सबसे बड़ा सहायक है।
4. समय और श्रम की बचत: कंप्यूटर के कारण मिनटों का काम सेकंडों में हो जाता है, जिससे मनुष्य के समय और मेहनत दोनों की बचत होती है।
5. उपसंहार: कंप्यूटर एक अद्भुत आविष्कार है। इसका सही दिशा में उपयोग हमारे और देश के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
Disclaimer इस पोस्ट में जो पेपर है वह है सिर्फ महत्वपूर्ण प्रश्न और मॉडल पेपर के लिए बनाया गया है मतलब कि छात्रों को किस तरह का वार्षिक पेपर और कैसे आएगा उसके उद्देश्य के लिए बनाया गया है इसको रियल नाम समझा, किसी के साथ जब रियल पेपर आने पर उसके सॉल्यूशन के साथ इसी वेबसाइट पर अपलोड किया जाएंगे जिससे कि आप प्रश्न पत्र के सही उत्तर जान सके.
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